एक नगर में एक मशहूर चित्रकार रहता था ।

एक नगर में एक मशहूर चित्रकार रहता था ।

चित्रकार ने एक बहुत सुन्दर त स्वीर बनाई और उसे नगर के चौराहे मे लगा दिया और नीचे लिख दिया कि जिस किसी को , जहाँ भी इस में कमी नजर आये वह वहाँ निशान लगा दे ।

जब उसने शाम को तस्वीर देखी उसकी पूरी तस्वीर पर निशानों से ख़राब हो चुकी थी । यह देख वह बहुत दुखी हुआ । उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था कि अब क्या करे वह दुःखी बैठा हुआ था ।

तभी उसका एक मित्र वहाँ से गुजरा उसने उस के दुःखी होने का कारण पूछा तो उसने उसे पूरी घटना बताई । उसने कहा एक काम करो कल दूसरी तस्वीर बनाना और उस मे लिखना कि जिस किसी को इस तस्वीर मे जहाँ कहीं भी कोई कमी नजर आये उसे सही कर दे ।

उसने अगले दिन यही किया । शाम को जब उसने अपनी तस्वीर देखी तो उसने देखा की तस्वीर पर किसी ने कुछ नहीं किया ।

वह संसार की रीति समझ गया । “कमी निकालना , निंदा करना , बुराई करना आसान , लेकिन उन कमियों को दूर करना अत्यंत कठिन होता है
” This is life……..

जब दुनिया यह कह्ती है कि
‘हार मान लो’
तो आशा धीरे से कान में कह्ती है कि.,,,,
‘एक बार फिर प्रयास करो’
और यह ठीक भी है..,,,
“जिंदगी आईसक्रीम की तरह है, टेस्ट करो तो भी पिघलती है;.,,,

वेस्ट करो तो भी पिघलती है,,,,,,
इसलिए जिंदगी को टेस्ट करना सीखो,
वेस्ट तो हो ही रही है.,,,
Intercast Marriage ,The Vivah Sanskar will be solemnised,16sanskaro ke liye smpark kre 9977987777

सुझाव देना बहुत कठिन और खतरनाक काम है

सुझाव देना बहुत कठिन और खतरनाक काम है। सब को सुझाव देने का अधिकार भी नहीं है, इसलिए अनधिकार चेष्टा न करें।
अभी कुछ दिन पहले मैंने अपने संदेश में लिखा था कि भारत में बिना पूछे, बिना मांगे सुझाव देने की लोगों को बहुत बीमारी है। बार-बार उन्हें खुजली उठती है सुझाव देने की।
क्योंकि लोग दूसरों का सुझाव सुनना नहीं चाहते। और बिना पूछे, बिना मांगे ही उन्हें रोज सुझाव दिए जाते हैं। इसलिए वे इन सुझावों से तंग आकर इस क्रिया को खुजली और बीमारी के नाम से बोलकर, अपना गुस्सा कुछ ठंडा कर लेते हैं। तो क्यों न इस विषय पर गंभीरता से विचार किया जाए।
जब कोई दूसरा व्यक्ति आपको बिना मांगे, बिना पूछे सुझाव देता है, तब आपको अच्छा नहीं लगता। क्या यही बात आप दूसरों के लिए नहीं सोच सकते, कि जैसे आपको दूसरे का बिना मांगा हुआ सुझाव अच्छा नहीं लगता, तो दूसरे को भी बिना मांगे आपका सुझाव सुनने पर अच्छा कैसे लगेगा? इसलिए विचार करें और बिना मांगे, बिना पूछे दूसरों को सुझाव न दें।
सुझाव देते समय प्राय: बड़ी-बड़ी 3 गलतियां होती हैं। उन गलतियों को समझने का प्रयास करें और उन गलतियों से बचें।
पहली गलती — बिना पूछे, बिना मांगे किसी को सुझाव देना। विदेशों में ऐसा देखा जाता है कि जब भी कोई व्यक्ति किसी को सुझाव देना चाहता है, तो वह एक्सक्यूज मी, इन शब्दों से पहले पूछता है, क्या मैं आपको सुझाव दे सकता हूं? यदि दूसरा व्यक्ति कहे कि — हां मैं सुनना चाहता हूं। तब वह अपना सुझाव उसको देता है। ऐसे ही आप सब को भी भारत में यदि किसी को सुझाव देना हो, तो पहले उससे पूछना चाहिए। कि मैं आपको इस विषय में एक सुझाव देना चाहता हूं. क्या आप मेरा सुझाव सुनना चाहते हैं? यदि वह कहे कि – हां बताइए. तभी आप अपना सुझाव दें। बिना पूछे न दें। अथवा वह सामने से कहे, कि इस विषय में आप मुझे कुछ सुझाव दीजिए. तो आप सुझाव दे सकते हैं।
दूसरी गलती — अपने से अधिक योग्य व्यक्ति या बड़े अधिकारी को सुझाव देना। जब आप सुझाव देवें, तो पहले यह अवश्य देख लें, कि आप किसे सुझाव दे रहे हैं? जिस व्यक्ति को आप सुझाव देना चाहते हैं, यदि वह व्यक्ति आप से अधिक विद्वान है, अधिक अनुभवी है, या बड़ा अधिकारी है, तो उसे आप सुझाव न दें। प्राय: लोग ऐसी गलती करते हैं। यदि कोई रोगी व्यक्ति किसी ऊंचे अनुभवी डॉक्टर साहब को चिकित्सा के मामले में सुझाव देवे, तो क्या यह उचित है? क्या कोई पुलिस कांस्टेबल, डीएसपी साहब को या आईजी साहब को पुलिस सुरक्षा संबंधी सुझाव दे सकता है? क्या कोई चपरासी, बैंक के मैनेजर को अकाउंट्स लिखने के मामले में सुझाव दे सकता है? यदि नहीं। तो सब लोगों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए।
तीसरी गलती — बिना प्रमाण तर्क के सुझाव देना। जब लोग किसी विषय में कुछ खास जानते नहीं, उस विषय का उन्होंने अध्ययन नहीं किया, कोई विशेष अनुभव भी नहीं है, ऐसे अनेक क्षेत्रों में भी हमने देखा है, कि लोग बिना प्रमाण के, बिना तर्क के, यूं ही अपनी डेढ़ अक्ल लगाते रहते हैं। और बिना सिर पैर के, उल्टे-सीधे सुझाव देते रहते हैं। रोज ही अनेक मैसेज आप whatsapp आदि पर देखते होंगे, जिनमें यह लिखा रहता है कि इस नुस्खे से आपका यह रोग दूर हो जाएगा। अब न तो मैसेज भेजने वाले का चिकित्सा विज्ञान में कोई अनुभव है, न वह डिग्री प्राप्त प्रशिक्षित चिकित्सक है। सिर्फ मैसेज फॉरवर्ड करके अपना नाम कमाना चाहता है, यह उचित नहीं है। इस प्रकार के मैसेज या अनुभव हीन सुझावों से लाभ तो कुछ होता नहीं, बल्कि सुझाव सुनने वाले का क्रोध और अधिक बढ़ जाता है। तो इस तीसरी गलती से भी बचना चाहिए।
एक और उदाहरण — एक बिजली का कारीगर बिजली ठीक कर रहा था। तो किसी अनाड़ी व्यक्ति ने बिना सोचे समझे उसे सुझाव देने शुरू कर दिए। उस कारीगर को और अधिक गुस्सा आया। वह मन ही मन में सोचने लगा कि इस मूर्ख को बिजली का कुछ पता तो है नहीं। और यह मुझे बिना सिर पैर के सुझाव दे रहा है। कितना मूर्ख है यह।
तो इस प्रकार से सोचना चाहिए। यदि आप किसी विषय में किसी व्यक्ति को सुझाव दे रहे हैं, और उस विषय में आपके पास कोई प्रमाण तर्क है नहीं, कोई अनुभव है नहीं, तो उस विषय में सुझाव नहीं देना चाहिए। बल्कि मौन रहकर उस कार्य को सीखना चाहिए। बिना सीखे, बिना सोचे समझे किसी को भी, कुछ भी सुझाव नहीं देना चाहिए।
परंतु आप भी ऐसा अनुभव करते होंगे कि, लोग इन तीनों गलतियों को करते रहते हैं, रुकते ही नहीं। स्वयं पर संयम नहीं रखते और बिना सोचे समझे, किसी को भी, बिना प्रमाण तर्क का कुछ भी सुझाव देते ही रहते हैं। कृपया इस खुजली या बीमारी से बचने का प्रयास करें। दूसरों की दृष्टि में मूर्ख न कहलाएं। व्यर्थ में अपनी खिल्ली न उड़वाएं। ऐसे बेढ़ंगे सुझाव देने पर यदि किसी दिन, किसी ने आपको डांट दिया, तब आप को बहुत कष्ट होगा।
– स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक

संसार में सुख दुख तो आते रहते हैं। इसका नाम ही तो संसार है।

संसार में सुख दुख तो आते रहते हैं। इसका नाम ही तो संसार है। सुख में सुखी न हों, दुख में दुखी न हों। इसी में जीवन की सफलता है।
महर्षि कपिल जी ने सांख्यदर्शन में बताया है कि संसार उसे कहते हैं जहां हर समय राग द्वेष का व्यवहार चलता ही रहता है। कहीं शरीर में, कहीं वाणी में, और कहीं मन में। यदि वाणी और शरीर से राग द्वेष का व्यवहार रुक भी जाए, तो भी मन में तो चलता ही रहता है।
जिस व्यक्ति ने संसार में जन्म लिया है, वह अनेक सुख भी भोगता और दुखों से भी पीड़ित होता है। और जब जीवन में सुख दुख आते हैं, तो राग द्वेष होना स्वाभाविक है। उस राग द्वेष से फिर आगे अच्छे बुरे कर्म होते हैं। और उन कर्मों से फिर अगला जन्म तथा फिर से सुख-दुख मिलता है। इस प्रकार से यह चक्र लगातार चलता ही रहता है। सुख-दुख, राग द्वेष, शुभ कर्म अशुभ कर्म, इन छह चीजों का चक्र हमेशा से चल रहा है, और आगे भी अनंत काल तक चलता रहेगा। इसी चक्र का नाम संसार चक्र है।
क्या इस चक्र से छूटने का कोई उपाय है? जी हां। मोक्ष प्राप्ति एक उपाय है। कोई व्यक्ति यदि मोक्ष प्राप्त कर लेवे, तो इन 6 वस्तुओं के चक्र से बाहर निकल जाएगा। जन्म मरण चक्र से भी छूट जाएगा। इन दोनों चक्रों से जब छूट जाएगा, इसी का नाम मोक्ष है। मोक्ष में आत्मा सब प्रकार के दुखों से रहित हो जाता है, और ईश्वर के आनंद को बहुत लंबे समय तक भोगता है।
जब तक मोक्ष नहीं होता, तब तक संसार में रहना होगा। और संसार में रहते हुए जब जब ये सुख दुख, राग द्वेष की परिस्थितियां आएंगी, इनसे युद्ध करना होगा। जो व्यक्ति इनसे युद्ध करके जीत जाएगा, वही इस चक्र से पार हो पाएगा, छूट पाएगा।
प्रश्न — तो इनसे कैसे युद्ध किया जाए? उत्तर — जब सुख आए तो बहुत उछलना नहीं, कूदना नहीं, नाचना नहीं, बहुत खुशी नहीं मनाना। उसे सामान्य रूप से निभा लेना। इसी प्रकार से जब दुख आए, तब दुखी परेशान चिंतित नहीं होना।
ऐसी स्थितियों में यह सोचना चाहिए, कि यह तो संसार है, सुख आता है, चला जाता है। दुख भी आया है, यह भी चला जाएगा। न तो सुख सदा हमारे साथ रहता है, न ही यह दुख सदा हमारे साथ रहेगा। इस प्रकार का चिंतन करके सुख-दुख को समान भाव से स्वीकार करना चाहिए। इस प्रकार से इन सुख दुख, राग द्वेष आदि शत्रुओं से युद्ध करना चाहिए।
यह कठिन कार्य है। यदि व्यक्ति ईमानदारी से पुरुषार्थ करे, तो धीरे-धीरे चिंतन करते-करते वह लंबे समय में, ऊपर बताई विधि के अनुसार, ऐसा युद्ध करने में समर्थ हो जाएगा, और वह इस युद्ध में जीत भी जाएगा।
तो सार यह हुआ कि, इस प्रकार से जीवन में किसी भी घटना के होने पर, अधिक प्रसन्न भी न होवें, और दुखी परेशान चिंतित भी न होवें। अपने मन की स्थिति को नियंत्रित रखें। ईश्वर की उपासना करें, विशेष रूप से दुःख की घटनाओं में। ईश्वर से आपको बहुत शक्ति मिलेगी, और आप इस कार्य में सफल हो जाएंगे।
– स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक
Intercast Marriage ,The Vivah Sanskar will be solemnised,16sanskaro ke liye smpark kre 9977987777