लेखक अपरिचित है, लेख बहुत अच्छा है

लेखक अपरिचित है, लेख बहुत अच्छा है

कभी कभी सोचता हूँ कि यदि मैं आर्य समाज के सम्पर्क में नहीं आया होता l तब मैं भी एक पौराणिक हिन्दू ही होता l तब जीवन कितना आरामदायक होता l सब धर्म मुझे अच्छे लगते l मैं भी मोहम्मद साहब को शांति का देवता समझता, हर क़ब्र पर , हर मज़ार पर माथा टेकता , उन पर चादर चढ़ाता l गुरुवार को साईं बाबा के मंदिर में प्रसाद चढ़ाता।

सोमवार को भोले बाबा के मंदिर में जाकर शिवलिंग का दूध से अभिषेक करता , मंगलवार को हनुमान जी के मंदिर में जाकर उन्हें सिंदूर का चोला चढ़ाता l आठों उँगलियों में तरह तरह की अँगूठियाँ पहनता, शनिवार को शनि महाराज को तेल चढ़ाता , मूर्तियों को ही नहीं, हर बाबा को , गेरुए वस्त्रधारी को गुरु घण्टाल को भी भगवान मान कर पूजता l सब संप्रदायों की तारीफ़ करता , सब संप्रदाय अच्छे हैं, किसी की भी बुराई नहीं करनी चाहिये इस बात को दिन में दस बार दोहराता l तब सब लोग मेरी तारीफ़ करते l मुझे एक नेक और समझदार इंसान बताते हुए मेरे गुण गाते l

ईद से पहले मैं पूरे उत्साह से रोज़ा ए इफ़्तार का आयोजन करता, श्राद्ध के दिनो में ब्राह्मण और क़व्वों को दावत खिलाता, होली और शिवरात्रि पर भांग पीता तथा दिवाली पर जुआ खेलताl ज़िंदगी कितनी शुकून भरी होतीl शराबबंदी होने पर शिवरात्रि में कावड़ की मटकियों में शराब भरकर लाता और अपनी यात्रा की थकान उतारता। नवरात्रि में माता की भेंटे गाता, साईं संध्या का आयोजन करवाता l जहाँ भी भागवत की कथा या रास लीला होती वहीं भाग कर जाता और भजनों पर झूम झूम कर नाचता l

अजमेर में ख्वाजा की दरगाह पर चादर चढ़ाता और वैष्णो देवी पर छत्रl हर तरह के टोने टोटक़े , भूत पिशाच , ऊपरी हवा में विश्वास करता और मेहंदीपुर बालाजी और खाटु श्यामू जी के मंदिर में हाजरी लगाता l जगन्नाथ जी की रथ यात्रा में उनका रथ खींचता और इस्कोन के मंदिर में हरे रामा हरे कृष्णा की धुनों पर कूद- कूद कर नाचता, कितना मजा रहता l

इन बातों से जीवन कितना खुशी से भरा होता पर अफ़सोस! ऋषि दयानंद ने मुझसे यह सब कुछ छीन लिया l आज तो मैं अपने ही हिन्दू भाइयों की नज़र में एक झगड़ालू इंसान बन कर रह गया हूँ l

हे प्रभु मैंने आर्यसमाजी बनकर तेरे वेदों की रक्षा की है, तेरे वेदों के आधार पर बनाए ऋषियों के शास्त्रों की रक्षा की है। मैंने तेरे सच्चे सनातन धर्म की रक्षा की लो जगाए रखी है। प्रभु जी! तुमने वेद में बताया की हे मनुष्य! तेरा राष्ट्र ही तेरा इष्टदेव है। इसलिए मैंने भारत की आजादी में बड़े-बड़े बलिदान दिये, कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। मैं राष्ट्र का सजग प्रहरी बना रहा हूं। मैंने तुम्हारे बताए अनुसार धर्म और राष्ट्र की रक्षा की है। मैंने श्री राम और श्री कृष्ण के सच्चे शानदार जीवन का, उनके शौर्य और पराक्रम का गौरवमयी रूप में प्रचार किया है।

राष्ट्र पर जब जब भी बाढ़, भूकंप से इंसान पीड़ित हुआ, तो मैं सहायता सामग्री लेकर उनके पास दौड़ा-दौड़ा गया। अधिक से अधिक दुःखी लोगों के आंसुओं को पोंछा।
हे प्रभु! ऋषि दयानंद के माध्यम से बताए हुए तेरे ज्ञान को मैंने अपने जीवन में अति उत्तम पाया है, मैं देख पाया कि धर्म के नाम पर हिंदू कितना लापरवाह आडंबर युक्त और केवल भाग्य के भरोसे रह रह कर कितनी नीची दशा को जा रहा है। मैंने सनातन वैदिक धर्मी होकर जीवन जिया है इसलिए प्रभु तुम्हारे विधान अनुसार मेरा अगला जन्म मनुष्य रूप में तो अवश्य ही होना है, परंतु आपसे इतनी हार्दिक प्रार्थना जरूर है कि हे प्रभु! मुझे अगले जन्म में अपने सनातन वेद धर्मी आर्य समाजी परिवार में ही जन्म देना ताकि तब मैं बचपन से ही तेरे सच्चे धर्म और अपने राष्ट्र की सेवा कर सकूं।

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