हम अपने शरीर को कैसे सजाएं

हम अपने शरीर को कैसे सजाएं

हम अपने शरीर को कैसे सजाएं
शरीर को सजाने का तात्पर्य हम अपने आंतरिक गुणों का विकास कैसे करें| क्या शरीर की सुंदरता ब्यूटी पार्लर से होगी या हमारे गुणों के विकास से होगी।
एक बहुत सुंदर शरीरवालि किंतु अवगुण, दुर्गुणवाला मनुष्य है तो क्या वह सुंदरता का पर्याय होगा| नहीं होगा अर्थात बुद्धि के द्वारा व्यक्तित्व विकास करना, पर्सनैलिटी डेवलपमेंट करना वास्तव में शरीर को सजाना कहलाता है। व्यक्ति विकास हम कैसे करें ? जिससे कि हमारे हमारी शारीरिक सुंदरता बन जाये।
संसार ,पूरा समाज बाहरी सुंदरता की ओर दौड़ रहा है जबकि बहारी सुंदरता से अत्यधिक आंतरिक सुंदरता की आवश्यकता होती है और वह आंतरिक सुंदरता केवल मात्र सद्गुणों से आ सकती है । यही बात आज के वैदिक विचार में कहीं जा रही है कि जिस प्रकार से यज्ञ वेदी हवन की वेदी को हम सजाते हैं वैसे ही हम अपने शरीर को आंतरिक गुणों से सजाएं ।। हमारे व्यक्तित्व को विकसित करें – उन्नत करें। पर्सनालिटी डेवलपमेंट करना है तो हम आंतरिक गुणों का हि विशेष रूप से विकास करें ।
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