पोराणिक हिंदूओ की ८ शंकाओं का समाधान

पोराणिक हिंदूओ की ८ शंकाओं का समाधान ⚜️
(1) प्रश्न : – क्या रावण के दस सिर थे ?
☀️उत्तर : – नहीं रावण 4 वेदों और 6 शास्त्रों का विद्वान् था । तो जिसके कारण उसको दस दिमाग वाला दशानन कहा जाता था । तो इसी कारण 4 + 6 = 10 , उसको दशानन कहा जाता है । जिसका अर्थ दस सिर कदापि नहीं है ।
(2) प्रश्नः – क्या हनुमान जी बंदर थे ? और उनकी पूँछ भी थी ?
☀️उत्तर : – नहीं वे मनुष्य थे । क्योंकि जिस जाती के वे थे वह वानर जाती कहलाती है । और जैसे भील नामक जाती थी वैसे ही वानर भी थी । वानर का तात्पर्य बंदर कभी नहीं होता । और पूँछ वाली बात तुलसी कृत रामचरितमानस में आती है । वाल्मीकि रामायण में ऐसी गप्पें नहीं हैं । आजकल जो TV serial रामायण पर बनते हैं वे भी तुलसी की रामचरितमानस के आधार पर बनते हैं । जिसके कारण लोगों के मनों में यह पूँछ वाले हनुमान जी बैठ गये हैं । अपनी गदा लेकर !! और serial बनाने वालों से पूछना चाहिये कि जिन वानरों को आप TV में बंदर मुखी दिखाते हो , तो उनकी स्त्रियों को वैसा क्यों नहीं दिखाते ? क्यों वे मानवी ही होती हैं ? क्यों नहीं उनके भी पूँछ और बंदर का मुख होता ?

(3) प्रश्नः – क्या कृष्ण गोपियों से क्रीड़ा करते थे ? और जब वे तालाब में नहातीं तो वे उनके कपड़े ले भागते थे ?
☀️उत्तर : – नहीं , कृष्ण का जन्म होते ही वह कुछ वर्ष अपनी प्रथम आया के वहाँ रहे । करीब 6 वर्ष तक वह वृदावन में खेलते कूदते रहे । और फिर अवनंतिकापुरी में सांदिपनी के गुरुकुल में भेजा गया । तो वह 30 वर्ष की आयु तक विद्या प्राप्त करके वापिस आये और आकर उनको मथुरा में जनसंघ की स्थापना करनी थी , कंस का चक्रव्यूह तोड़ कर । तो उसके पश्चात् वे कौरवों और पांडवों के झगड़े मिटाने को हस्तिनापुर और विदेह आदि राज्यों के चक्कर काटते रहे । तो यह रास रचाने और कपडे उठाने का समय उनको कब मिला ? यह झूठी भागवत हैं ।
(4) प्रश्न : – क्या ब्रह्मा के चार मुख थे ?
☀️उत्तर : – नहीं , ब्रह्मा का एक ही मुख था । चारों वेदों के प्रकाण्ड विद्वान् कहा जाता था , यानी कि चारों ओर से ज्ञानी जिसको चतुर्मुखी कहा जाता था । तो ब्रह्मा एक उपाधि थी । कई ब्रह्मा सृष्टि की आदि से ले कर अब तक हो गये हैं । और उनके एक ही मुँह था ।
(5) प्रश्न : – क्या विष्णु के चार भुजायें थीं ?
☀️उत्तर : – नहीं ! विष्णु नामक कोई काल्पनिक ईश्वर नहीं है , जिसको आप चित्रों में देखते हो । विष्णु निराकार ईश्वर का ही एक नाम है ।
(6) प्रश्न : – क्या गणेश का मुँह हाथी का था ?
☀️उत्तर : – हाथी के बच्चे का मुँह इतना चौड़ा होता है कि उसका भार एक छोटे बच्चे का शरीर कैसे सम्भालेगा ? अरे उस हाथी के सिर और मनुष्य के बच्चे का तो व्यास ( Diameter ) ही आपस में मेल नहीं खायेगा ? और जैसा कि शिव पुराण की कथा में आता है कि शिवजी ने क्रोध में गणेश का सिर काट दिया , तो फिर वो हाथी के बच्चे का ही शरीर क्यों ढूंढने दौड़े ? उन्होंने वही अपने पुत्र का मनुष्य का कटा हुआ सिर क्यों नहीं लगाया ? ये सब मिथ्या और अप्रामाणिक बाते हैं ।
(7) प्रश्न : – क्या राम और कृष्ण ईश्वर या ईश्वर के अवतार थे ?
☀️उत्तर : – नहीं ! ईश्वर शरीर में नहीं आता । वह निराकार है । हम जानते हैं कि कोई पदार्थ जब परिवर्तित होता है तो वह अपनी पहली वाली अवस्था से या तो बेहतर होता है या कम ? तो अगर ईश्वर का अवतार मानें तो क्या वह पहले से बेहतर हुआ ? अगर हाँ तो क्या वह पहले पूर्ण नहीं था ? तो फिर सृष्टि को कैसे रचता ? और यदि पहले से उसकी शक्ति कम हुई तो यह भी दोष की बात है । दूसरी बात यह है कि ईश्वर निराकार है और अनन्त शक्ति वाला । पर मनुष्य सीमित शक्ति वाला है । अवतार केवल जीवों का होता है जिसके पुनर्जन्म कहते हैं । ईश्वर का अवतार कभी नहीं होता ।
⚜️स्वामी दयानंद सरस्वती ने आर्य समाज के नियम ३ व ४ में लिखा है की –
३. वेद सब सत्यविद्याओं का पुस्तक है। वेद का पढना – पढाना और सुनना – सुनाना सब आर्यों का परम धर्म है।
४. सत्य के ग्रहण करने और असत्य के छोडने में सर्वदा उद्यत रहना चाहिये। ⚜️
☀️आओ सभी मिथ्या ग्रंथों (पुराणो आदि ) को छोड़ कर वेद की ओर लोट चले ☀️
॥ ओ३म् ॥

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