वैदिक विचार

एक ही बात को अनेक प्रकार से कहा जा सकता है। परंतु जब कोई बात सकारात्मक शब्दों में कही जाती है, तो वह उत्साहवर्धक होती है। और यदि आप नकारात्मक भाव से किसी चीज को कहते हैं, तो उसका प्रभाव  निराशाजनक होता है।
उदाहरण के लिए, जैसे किसी ने कहा कि यह ग्लास पानी से आधा भरा हुआ है। यह सकारात्मक भाव से कथन है। इससे उत्साह बढ़ता है, कि चलो आधा पानी तो है।
अब इसी बात को दूसरे शब्दों में यूं भी कहा जा सकता है, कि, इस ग्लास में तो आधा ही पानी है! इस कथन में उत्साह नहीं बढ़ता, बल्कि भंग होता है, निराशा आती है।
तो हमें बोलते समय ध्यान रखना चाहिए कि हम किसी बात को इस प्रकार से अभिव्यक्त करें, कि लोगों का उत्साह बढ़े।  लोग अच्छाई की ओर प्रवृत्त हों, और निराशा एवं बुराई से बचें।
यदि आप ऐसा कहते हैं कि संसार में बहुत से अच्छे लोग हैं, जो मनुष्यों की और प्राणियों की सेवा तथा रक्षा करते हैं। तो यह कथन उत्साहवर्धक है। और यदि आप इसी बात को इस प्रकार से कहें, कि दुनिया में कुछ ऐसे दुष्ट लोग हैं, जिन्होंने दुनियाँ का जीना हराम कर रखा है।  इस कथन से उत्साह भंग होता है, और निराशा बढ़ती है।
इसलिए सब जगह पर विचारने तथा बोलने में ध्यान रखें। उत्तम जीवन जीने के लिए उत्साह की आवश्यकता है। अच्छे तथा सकारात्मक शब्द बोलें। अपना और दूसरों का उत्साह बढ़ाएं.

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