समय आ गया है

समय आ गया है

अन्त में जब उनकी सार्वजनिक सेवकाई समाप्त हो गयी और मृत्यु अवश्यम्भावी था, तब यीशु ने ये शब्द कहे थे, “वह समय आ गया है, कि मनुष्य के पुत्र की महिमा हो”। और उसने आगे प्रार्थना किया, “जब मेरा जी व्याकुल हो रहा है। इसलिये अब मैं क्या कहूं? हे पिता, मुझे इस घड़ी से बचा? परन्तु मैं इसी कारण इस घड़ी को पहुंचा हूं। हे पिता अपने नाम की महिमा कर” (यूहन्ना १२:२३, २७-२८)।

अपने अन्तिम फसह के भोज के अवसर पर भी यीशु ने अपने चेलों को ऐसे ही शब्द कहे थे। हम पढते हैं, “फसह के पर्व से पहिले जब यीशु ने जान लिया, कि मेरी वह घड़ी आ पहुंची है कि जगत छोड़कर पिता के पास जाऊं” (यूहन्ना १३:१), और बाद में उसी शाम उसने अपनी अन्तिम महान् प्रार्थना इन शब्दों में आरम्भ किया, “हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे ”(यूहन्ना १७:१)।

उसकी मृत्यु का समय ही उसकी महिमा का समय था!

इस विश्व के महान् हस्तियों से यीशु एकदम अलग थे। जब कोई राष्ट्रपति या प्रधान मन्त्री अपने देश के सर्वोच्च पद की शपथ लेता है तो वह समय उसके जीवन की विशेष और अद्भूत घडी होती है। उसका समय आ गया होता है। सम्पूर्ण विश्व की नजर उन्हीं की ओर होती है। चार या पाँच वर्षों का कार्य-काल समाप्त होने के बाद वे विश्व की नजर से गायब हो जाते हैं। उनका काम समाप्त हो जाता है। बीस या पचीस वर्षों का बाद जब उनकी मृत्यु हो जाती है, तब सिर्फ उनका नाम ही इतिहास में बाकी रह जाता है। उनका समाचार पत्रों में या टेलीभीजन में मुख्य समाचार बनना बर्षों पहले रुक गया होता है।

यीशु के लिये उनकी महिमा का समय सन्सार की मान्यताओं के एकदम विपरीत था। उनकी एक साधारण अपराधी की तरह ३३ बर्ष के अल्पायु में दु:खद मृत्यु हुई, उनके सभी अनुयायी उन्हें अकेला छोड गये थे और उनका मिसन असफल हो गया था।

लेकिन यीशु ने अन्धकार से परिपूर्ण उस समय में विश्व के सभी महापुरुषों द्वारा हासिल किये गये सभी चिजों से भी अधिक हासिल कर लिया था, जो शारीरिक आँखों से देखा नहीं जा सकता था। यीशु ने अन्धकार की सारी शक्तियों का सामना करके उनपर विजय पा लिया था। उनके जीवन का वह असहनीय पीडा सम्पूर्ण मानव जाति के लिये अतुलनीय आशिष ले आया था। अनन्त के उस महान् घडी में उन्होंने सभी कष्टों को आनन्द में बदल डाला था, सभी रोगों को स्वास्थ्य में, सभी घृणा को प्रेम में, सभी अन्धकार को ज्योति में और सभी मृत्यु को जीवन में बदल दिया था। उन्हों ने सम्पूर्ण सृष्टी का भविष्य बदल कर इसे सडन के दासता से मुक्त कर दिया था।

अन्य में जब हमारी आँखें खुलेंगी और हम सभी चीजों को उनके वास्तविक स्वरुप में देखेंगे तब हम परमेश्वर की स्तुति करेंगे और जानेंगे कि उन्होंने यीशु की अन्तिम प्रार्थना का उत्तर दे दिया है, “हे पिता, वह घड़ी आ पहुंची, अपने पुत्र की महिमा कर, कि पुत्र भी तेरी महिमा करे”

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