गुरुदेव को नमन

य मे छिद्रं चक्षुषों, हृदयस्य, मनसो वातितृष्णं, बृहस्पतिर् मे तद् दधातु ।

शं नो भवतु भुवनस्य यस् पतिः ।

बहस्पति परमात्मा का नाम है । वेद के विद्वान् आचार्य को भी बृहस्पति कहा जा सकता हैहमारे जीवन की वटियाँ गुरुदेव ही दूर करते हैं । राम को विश्वामित्र ने, पाण्डवों को द्रोणाचार्य ने, शिवाजी को. समर्थ राम- दास ने और ऋषि दयानन्द को स्वामी विरजानन्द ने योग्य बनाया। अनादि काल से हमारे देश में गुरु-शिष्य की पवित्र परंपरा चली आती है।

प्रत्येक प्रात्मा मानव देह में श्राकर सुख, शान्ति, आनन्द चाहता है। किंतु ये मिलते उसी को हैं जिन पर उस भवनपति की कृपा हो गई हो और बृहस्पति गुरु की शरण में जा पड़ा हो जब तक जीवन में दोषों, विकारों के छिद्र हैं तब तक सुख, शान्ति, आनन्द मिलना असंभव है।

ईश्वर ने इस सृष्टि को अति सुन्दर बनाया है जब भी हम सौन्दर्य को देखकर हमारे मन अथ वा शरीर किसी भी इन्द्रिय में विकार आता है तो हमारे जीवन में छिद्र या दोष या जाता है। किसी के प्रति हमारे मन में द्वेष उत्पन्न होता है तो समझो हमारा मन कट गया है, उसमें तरेड़ आ गई है, छिद्र हो गया है किसी के प्रति हमारे मन में दुर्भावना पाती है तो, जानो हमारे मन में छिद्र हो गया है । यही सब कुवास- नायों की तरे. व छिद्र जीवन को अशान्त व वेहाल कर देते हैं। उस व्याकुलता के समय ईशकृपा और वहस्पति गुरु के सहारे ही मानव मुक्ति प्राप्त करता है। मेरे जीवन की त्रुटियों को गुरु दूर करे ताकि एक एक व्यक्ति के पवित्र होने से सर्वत्र सुख हो-परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व में सुख शान्ति हो ।

छिद्र का होना अत्यन्त हानिकारक हैशरीर के एक अंग में फोड़ा निकला तो सारा शरीर दु:खी होगा। परिवार का एक सदस्य बिगड़ा तो सारा परिवार उसका फल भोगेगाराष्ट्र का एक हिस्सा विद्रोह करेगा तो सारा राष्ट्र कमजोर होगा। मैं मेरी त्रुटियां दूर करू तो मेरा परिवार, समाज और राष्ट्र सभी सुख-शान्ति का अनुभव करेंगे।

यदि शीतल जल के कलश में छिद्र हो जाय तो सारा कलश खाली हो जायेगा। यात्रियों से भरी नाव में छिद्र हो जाय तो नाव डूबने से सभी मरेंगे । पैर की एड़ी में तरेड़ पड़ जाती है तो शरीर कितना कष्ट पाता है। बांध में तरेड़ पड़ने पर कई गांवों के डूबने का ख़तरा उपस्थित हो जाता है। किसी के प्रति मन में तरेड़ पा जाय तो परिवारों से सूख-शान्ति विदा हो जाती है। पूज्य स्वामी दयानन्द के मिशन के सच्चे मिशनरी गुरुदेव स्वामी विद्यानंद जी ‘विदेह’ ने त जाने कितने लोगों और परिवारों के दोषों को दर करके समाज और जाति का कल्याण किया है। ‘विदेह’ जी के ‘वेदालोक’ में इस और ऐसे अनेक मंत्रों की सन्दर व्याख्या को श्रद्धापूर्वक पढ़। वेदमाता जीवन के सब छिद्रों को पूरेगीं । असीम सख की वष्टि होगी और जीवन सार्थक होगा।

          पूज्य गुरुदेव ‘विदेह’ को सश्रद्ध नमन !

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