समय बड़ा बलवान 

समय बड़ा बलवान

          जीवन में समय का बड़ा महत्त्व है समय से ही जीवन है । समय की शक्ति अपार है। अंगरेजी कहावत है, Time is money, समय धन है । समय बल भी है। समय को व्यर्थ खोना धन एवं शक्ति को खोना है।

         एक दार्शनिक ने कहा था- ‘समय के सिर पर प्रागे की तरफ लम्बे बाल हैं, पीछे का हिस्सा गंजा है जब वह सामने आ रहा हो तो पकड़ा जा सकता है । निकल गया तो हाथ मलते ही रह जायोगे अब पछताये होत वया, जब चिड़िया चुग गई खेत ।

           धन-दौलत तो परिश्रम और बुद्धि-कौशल से अजित कर लो, स्वास्थ्य पौष्टिक आहार एवं उचित उपचार से पुन: प्राप्त कर लो; भूली हुई विद्या भी अभ्यास से स्मरण कर लो; किन्तु बीता हुअा समय लौटाया नहीं जा सकताकाल का पहिया आगे ही आगे बढ़ता है, पीछे नहीं र लौटता ।

           सिकन्दर की चन्द साँसें ही शेष थीं। वह अन्त समय में अपनी मां से मिलना चाहता था। सब धन-दौलत, राज-पाट देने को तैयार था। पर उससे कुछ ज्ञान भी नहीं खरीद सका । सामान सौ बरस का, पल की खबर नहीं।

          रावण भी शुभ हितकारी कार्यों को कल पर टालता रहा । कल तो कभी पाया नहीं; काल आगया इसी लिए कहा है-

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।

पल में परले होयगी, फेरि करेगो कब ॥

         युधिष्ठिर ने एक भिक्ष से कहा-कल पाना, हम कल देंगे । भीम ने उठकर ढोल बजाना शुरू किया, और कहा, ‘धर्मराज ने काल को जीत लिया है। इन्हें कल के बारे में पक्का पता है। कल ये रहेंगे, भिक्षु भी रहेगा, धन भी रहेगा और देने का मन भी रहेगा। युधिष्ठिर का भूल का अहसास हुआ । उसी समय दान किया। यह जीवन थोड़ा है। कब यमराज का बुलावा पाजाये, क्या पता ? अतः पल-पल का सदुपयोग कर लेना है । एक पल से अधिक हमारे हाथ और कुछ भी नहीं है । प्राने बाला क्षण भविष्य है; जाने वाला क्षगा भूत है वर्तमान क्षण ही तो हमारी मम्पदा है । उसे सम्हाल लो, भूतभविष्य दोनों सम्हल जायेंगे । गप्पा में, व्यर्थ की चर्चानों में, दुव्यसनों में समय नहीं गंवाना है । सिनेमा, शतरंज, ताश. ग्रादि मैं मग्न होकर कहते हैं समय काट रहे हैं। ममय काट रहे हैं या ममय हमें काट रहा है ? जो समय की उपेक्षा करते हैं, समय उन्हें बरबाद कर देता है। समय बड़ा बलवान है-

तुलसी नर का पया बड़ा, समय बड़ा बलवान ।

नीलन लूटी गोफि  का, यहि अर्जुन वहि बाण ॥

         गांधी जी बहुत व्यस्त होते हुए भी समय का पूरा लाभ उठाते थे । दातीन करते समय मन में गीता के एक प्रलोक का मनन करते-करते उसे कठस्थ कर लेते थे । इस प्रकार उन्होंने अनेक श्लोक, मंत्र कंठस्थ किये थे। समय के बदले विद्या, वृद्धि, ग्रारोग्य, लक्ष्मी. ध्यान. समाधि ग्रादि को खरीदा जा सकता हैं । भगवान ने हमें प्रचुर समय रूपी धन देकर भेजा है। हम उसे कैसे खर्च कर रहे हैं ? सीता मासे जीवन निर्माण के लिए या विनाश के लिए ? स्वामी ‘विदेह’ की ‘गाथा’ पढ़ कर विदित हुया कि वे किम प्रकार नियम व अनुशासन से समय का लाभ उठाते थे, तभी तो अल्प समय में इतना वेद-प्रचार का कार्य कर पाये । स्वामी जी प्राय: प्रवचन में कहते थे, ‘कलाई में बंधी घड़ी भी हंसती है, रोती है। जो घड़ी का ख्याल करके ठीक समय पर कार्य करते हैं उन की घड़ी हँसती है । जो समय की उपेक्षा करते है उनकी घड़ी रोती है। हम निरीक्षण करें अपनी २४ घण्टे की दिनचर्या को । किस प्रकार का है हमारा समय विभाजन । आलस्य, प्रमाद को त्यागना है । समय के मूल्य को प्रांकना है। एक-एक क्षण का भरपूर सलाम लेना है। न अपना समय व्यर्थ करना है, न दूसरों के समय को नष्ट करना है। वक्त की कद्र करनी है।

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