? आज का वैदिक भजन ?

कविता छोटी है,परंतु सारांश बड़ा है

वाह रे जिंदगी

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    * दौलत की भूख ऐसी लगी की कमाने निकल गए *
    * ओर जब दौलत मिली तो हाथ से रिश्ते निकल गए *
    * बच्चो के साथ रहने की फुरसत ना मिल सकी *
    * ओर जब फुरसत मिली तो बच्चे कमाने निकल गए *
    वाह रे जिंदगी
    “”””””””””””””””””‘””””

    वाह रे जिंदगी
    “”””””””””””””””””‘””””
    * जिंदगी की आधी उम्र तक पैसा कमाया*
    *पैसा कमाने में इस शरीर को खराब किया *
    * बाकी आधी उम्र उसी पैसे को *
    * शरीर ठीक करने में लगाया *
    * ओर अंत मे क्या हुआ *
    * ना शरीर बचा ना ही पैसा *
    “”””‛””””””””””””””””””””””””””””'””””””””””
    वाह रे जिंदगी
    “”””””””””””””””””‘””””

    वाह रे जिंदगी
    “”””””””””””””””””‘””””
    * शमशान के बाहर लिखा था *
    * मंजिल तो तेरी ये ही थी *
    * बस जिंदगी बित गई आते आते *
    * क्या मिला तुझे इस दुनिया से *

    * अपनो ने ही जला दिया तुझे जाते जाते *
    वाह रे जिंदगी

    ? आज का वैदिक भजन ?
    श्वासों की माला से सिमरूँ मैं तेरा नाम
    बन जाऊँ बन्दा मैं तेरा हे कृपानिधान

    ऐसी कृपा करो प्रभु मेरे
    मिटे मन की तृष्णा और बन जायें तेरे
    सबसे हो प्रीति और बन जाये जीवन महान्
    श्वासों की माला से सिमरूँ मैं तेरा नाम

    प्रभु!मुझको पिला दो कोई अमृत का प्याला
    रँग दे इस दिल को हम, कर दो मतवाला
    मेरा है तन-मन सब कुछ तुझपे कुर्बान
    श्वासों की माला से सिमरूँ मैं तेरा नाम

    सदा पकड़ो मेरी बाहें
    कहीं भटक न जायें
    विषयों में फंस कर हम बहक न जायें
    जिस दिन तू निकले बिसर जाये मेरी जान
    श्वासों की माला से सिमरूँ मैं तेरा नाम
    स्वर :- पूज्य स्वामी रामदेव जी
    इस भजन की तुलना वेद मन्त्र से करें :-
    “सांसों की माला पे सिमरू मैं प्रभु का नाम”

    वायुमारोह धर्मणा (धर्मणा वायुम् आरोह) सामवेद 483
    कोई श्वास भक्तिरस से रिक्त न रहजाए।

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