Arya Samaj Marriage Rules

For Arya Samaj Marriage,the following documents of the bride and groom and items mentioned will be required:
* Documentary evidence of Date of Birth of both the parties. The minimum age at the time of marriage should be 21 for male and 18 for female.
* Affidavits, each from the bride and groom, stating their date of birth, marital status at the time of marriage and nationality.
* The affidavit must provide affirmation that the bride and groom are not related to each-other within the prohibited degree of relationship.
* A copy of divorce decree/order in case a divorcee or death certificate of spouse in case a widow/widower.
* Six passport size photos of each.
* Four witnesses. Identity proofs of the witnesses is mandatory.
Contact for more info.-
arya samaj indore
219 sanchar nagar ext.indore
452016
mo.9977987777,9977957777

आर्य समाज में विवाह हेतु आवश्यक दस्तावेज एवं जानकारी
1. वर-वधु दोनों के जन्म प्रमाण हेतु हाई स्कूल की अंकसूची या कोई शासकीय दस्तावेज तथा पहचान हेतु मतदाता परिचय पत्र या आधार कार्ड अथवा पासपोर्ट या अन्य कोई शासकीय दस्तावेज चाहिए। विवाह हेतु वर की अवस्था 21 वर्ष से अधिक तथा वधु की अवस्था 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।
2. वर-वधु दोनों को निर्धारित प्रारूप में ट्रस्ट द्वारा नियुक्त नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा। किसी अन्य नोटरी से सत्यापित शपथ पत्र स्वीकार नहीं किये जावेंगे।
3. वर-वधु दोनों की अलग-अलग पासपोर्ट साईज की 6-6 फोटो।
4. दोनों पक्षों से दो-दो मिलाकर कुल चार गवाह, परिचय-पहचान पत्र सहित। गवाहों की अवस्था 21 वर्ष से अधिक हो तथा वे हिन्दू-जैन-बौद्ध या सिक्ख होने चाहिएं।
5. विधवा/विधुर होने की स्थिति में पति/पत्नी का मृत्यु प्रमाण पत्रतथा तलाकशुदा होने की स्थिति में तलाकनामा (डिक्री) आवश्यक है।
6. वर-वधु का परस्पर गोत्र अलग-अलग होना चाहिए तथा हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार कोई निषिद्ध रिश्तेदारी नहीं होनी चाहिए।
आर्य समाज में सम्पन्न होने वाले विवाह “आर्य विवाह मान्यता अधिनियम-1937, अधिनियम क्रमांक 1937 का 19′ के अन्तर्गत कानूनी मान्यता प्राप्त हैं।
अधिक जानकारी के लिए
आर्य समाज संचार नगर इंदौर म.प्र,9977987777

arya samaj marriage

    आर्य समाज में विवाह हेतु आवश्यक जानकारी

    आर्य समाज में सम्पन्न होने वाले विवाह “आर्य विवाह मान्यता अधिनियम-1937, अधिनियम क्रमांक 1937 का 19′ के अन्तर्गत कानूनी मान्यता प्राप्त हैं।

    आर्य समाज संचार नगर =अखिल भारतीय आर्य सभा एवम सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली से सम्बंधित है।विवाह-आदि संस्कारो को करने से पूर्व यह सुनिश्चित कर लें कि आप जिस आर्य समाज से विवाह आदि करा रहें हें वह आर्य समाज सभा द्वारा सम्बन्धित हें या नही ,कुछ आर्यसमाज नाम से व्यक्तिगत संस्था रजिस्टर्ड करके स्वयं भ्रमित और गुमराह कर रहें,सावधान सभा द्वारा सम्बंधित एवम सामाजिक ,धार्मिक कार्य कनेवाली ही आर्य समाज में विवाह आदि 16 संस्कारो को कराएँ,..
    अत: जनहित में सूचना दी जाती है कि ,जो आर्य समाज सभा से सम्बंधित नहीं हें वहां विवाह आदि संस्कार कराने से पूर्व जाँच लें की ये कहीं व्यक्तिगत तो नहीं हें ,जिन्होंने केवल आर्य समाज संस्कार ,वैदिक विवाह ,आर्यसमाज ट्रस्ट,विवाह संस्कार केंद्र आदि नामों से कार्य कर रहें हें.
    आर्य समाज में प्रतिदिन हवन,वेद प्रवचन,साप्ताहि हवन-सत्संग,सभी 16 संस्कारों के करवाने की व्यवस्था होती हैं ,अनेकों सामाजिक -धार्मिक कार्यक्रम होतें हें.
    इनसे आर्यसमाज विधि से विवाह संस्कार व्यवस्था अथवा अन्य किसी भी व्यवहार करते समय यह पूरी तरह सुनिश्चित कर लें कि इनके द्वारा किया जा रहा कार्य पूरी तरह शासन

    सावधान -सावधान-सावधान ,,,,इंदौर में कुछ आर्य समाज हें ,जो आर्य समाज सभा से सम्बंधित हें वहीँ विवाह आदि संस्कार कराएँ.
    Arya Samaj Marriage, Arya Samaj Mandir, Court Marriage, Arya Samaj Head Office तथा प्रादेशिक कार्यालय और इससे मिलते-जुलते नामों से इण्टरनेट पर अनेक फर्जी वेबसाईट एवं गुमराह करने वाले आकर्षक विज्ञापन प्रसारित हो रहे हैं। अत: जनहित में सूचना दी जाती है कि इनसे आर्यसमाज विधि से विवाह-संस्कार के लिए सम्बन्धित संस्था को आर्य समाज विधि से अन्तरजातीय आदर्श विवाह करा सकने हेतु सभा से संबंधता हें या नहीं ,व्यगतिगत तो नहीं ?

    अधिक जानकारी के लिए = आर्य समाज संचार नगर इंदौर म.प्र.9977987777,9977957777 par samprak karen..

    वर-वधु दोनों के जन्म प्रमाण हेतु[1] हाई स्कूल की अंकसूची
    [2]पहचान हेतु मतदाता परिचय पत्र
    [3]आधार कार्ड
    [4]पासपोर्ट या अन्य कोई शासकीय दस्तावेज चाहिए।

    विवाह हेतु वर की अवस्था 21 वर्ष से अधिक तथा वधु की अवस्था 18 वर्ष से अधिक होनी चाहिए।

    वर-वधु दोनों को निर्धारित प्रारूप में नोटरी द्वारा सत्यापित शपथ पत्र प्रस्तुत करना होगा।

    वर-वधु दोनों की अलग-अलग पासपोर्ट साईज की 6-6 फोटो।

    दोनों पक्षों से दो-दो मिलाकर कुल चार गवाह, परिचय-पहचान पत्र एवम फोटो सहित।

    विधवा/विधुर होने की स्थिति में पति/पत्नी का मृत्यु प्रमाण -पत्र तथा तलाकशुदा होने की स्थिति में तलाकनामा (डिक्री) आवश्यक है।

    वर-वधु का परस्पर गोत्र अलग-अलग होना चाहिए तथा हिन्दू विवाह अधिनियम के अनुसार कोई निषिद्ध रिश्तेदारी नहीं होनी चाहिए।

    आर्य समाज विवाह की प्रक्रिया – आर्य समाज विवाह पण्डित जी द्वारा वैदिक मन्त्रों से हिन्दू रीति-रिवाज के अनुसार सम्पन्न कराया जाता है जिसमें पूजा, हवन, सप्तपदी, हृदय स्पर्श, ध्रुव-दर्शन, सिन्दूर, आशीर्वाद आदि रस्में करायी जाती हैं । विवाह संस्कार के दौरान फोटो खीचें जाते हैं जो विवाह का दस्तावेजी साक्ष्य होता है । विवाह सम्पन्न होने के पश्चात् मन्दिर की ओर से आर्य समाज विवाह प्रमाण – पत्र प्रदान किया जाता है । आर्य समाज द्वारा प्रदान किया गया विवाह प्रमाण – पत्र एक विधिक पति – पत्नी होने का साक्ष्य होता है, जो पूरी तरह वैध और विधिक होता है तथा जो माननीय उच्चतम न्यायलय एवं उच्च न्यायालय द्वारा विधि मान्य है । आर्य समाज विवाह प्रमाण – पत्र के आधार पर विवाह पंजीयन कार्यालय में पंजीकृत कराया जा सकता है, जिसमें हमारे विधिक सलाहकार आपकी पूरी मदद करते हैं ।

    प्रेमी युगलों की सुरक्षा एवं गोपनीयता – प्रेमी युगलों की सुरक्षा एवं गोपनीयता की गम्भीरता को ध्यान में रखते हुए तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रेमी युगलों की सुरक्षा सम्बन्धी दिये गये दिशा-निर्देशों के अनुपालन के अनुक्रम में हमारे आर्य समाज मन्दिर द्वारा विवाह के पूर्व या पश्चात वर एवं वधू की गोपनीयता एवं सुरक्षा का ध्यान रखते हुए विवाह से सम्बन्धित कोर्इ भी काग़जात, सूचना या जानकारी वर अथवा वधू के घर या उनके माता-पिता को नहीं भेजी जाती है, जिससे हमारे मन्दिर में विवाह करने वाले युगलों की पहचान को गोपनीय बनाये रखा जा सके, ताकि उनके जीवन की सुरक्षा को खतरा उत्पन्न न हो सके। साथ ही साथ उन्हें उनके माता-पिता या भार्इ द्वारा आनर किलिंग, हत्या, अपहरण जैसे जघन्य अपराधों से बचाया जा सके तथा प्रेमी युगलों को आत्महत्या के लिए मजबूर होने से रोका जा सके। जिससे हजारों प्रेमी युगलों की जान बच सके जो आये दिन मजबूर होकर ट्रेन के आगे कूदकर या फांसी लगाकर जान दे देतें हैं या उन्हें अपने ही माता-पिता या भार्इ के हाथों जान से हाथ धोना पड़ता है

    परिवार व समाज के लोगों का डर – प्रेम विवाह को भले ही कानूनी मान्यता मिली हुर्इ है तथा माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रेमी युगलों को सुरक्षा एवं संरक्षण प्राप्त है । परन्तु प्रेम विवाह करने वाले युवाओं के दिलो में आज भी अपने परिजनों व समाज का ख़ौफ इस कदर है कि जैसे मानो प्रेम विवाह करना कोर्इ अपराध या पाप हो। अगर मान लो किसी प्रेमी युगल ने घर से भागकर प्रेम विवाह कर लिया तो भी उनके दिल दिमाग में संशय बना रहता है कि उनकी शादी को समाज या परिवार मान्यता देगा या नहीं। झूठे मान सम्मान या जाति या दहेज के नाम पर नवविवाहित प्रेमी युगलों को जान से हाथ धोना पड़ता है और आनर किलिंग जैसे जघन्य अपराध का जन्म होता है, जिस पर माननीय उच्चतम न्यायालय प्रेम विवाह करने वाले युगलों की सुरक्षा को लेकर अत्यधिक गम्भीर व संजीदा है।

    आर्य समाज मन्दिर से विवाह पूरी तरह विधिमान्य है – एक वैध पंजीकृत आर्य समाज मन्दिर से किया गया विवाह संस्कार पूरी तरह विधि मान्य है। आर्य समाज मंदिर में विवाह संस्कार आर्य मैरिज वैलिडेशन एक्ट-1937 के अन्तर्गत वैदिक रीति द्वारा सम्पन्न कराया जाता है, जिसके ऊपर हिन्दू विवाह अधिनियम-1955 के प्रावधान भी लागू होते हैं। आर्य समाज मन्दिर द्वारा विवाह करना माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा मान्य है। हमारे आर्य समाज मन्दिर में विवाह संस्कार के दौरान वर (लड़का) व वधू (लड़की) की ओर से प्रस्तुत किये गये सभी दस्तावेजों जैसे आयु प्रमाण-पत्र, निवास प्रमाण-पत्र, शपथ-पत्र और विवाह संस्कार के दौरान खिंची गयी फोटो पूरी तरह सुरक्षित एवं गोपनीय रखी जाती है ताकि भविष्य में आवश्यकता पडने पर या विषम परिस्थितियों में किसी प्रकार के वाद-विवाद उत्पन्न होने की दशा में माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके और वैवाहिक स्थिति को स्पष्ट एवं प्रमाणित किया जा सके।

    अधिक जानकारी के लिये सम्पर्क करें-

    arya samaj 219 sanchar nagar indore m.p.9977987777’9977957777

सत्यार्थप्रकाश

अथ द्वितीयसमुल्लासारम्भः

….जैसी यह पृथिवी जड़ है, वैसे ही सूर्यादि लोक हैं। वे ताप और प्रकाशादि से भिन्न कुछ भी नहीं कर सकते। क्या ये चेतन हैं, जो क्रोधित हो के दुःख और शान्त हो के सुख दे सकें?

प्रश्न – क्या जो यह संसार में राजा-प्रजा-दुःखी हो रहे हैं, यह ग्रहों का फल नहीं है?

उत्तर- नहीं, ये सब पाप-पुण्यों के फल हैं।

प्रश्न -तो क्या ज्योतिष शास्त्र झूठा है?

उत्तर-नहीं, जो उसमें अङ्क, बीज, रेखागणित विद्या है, वह सब सच्ची, जो फल की लीला है, वह सब झूठी है।

प्रश्न – क्या जो यह जन्मपत्र है, सो निष्फल है?

उत्तर-हाँ, वह जन्मपत्र नहीं, किन्तु उसका नाम ‘शोकपत्र’ रखना चाहिए। क्योंकि जब सन्तान का जन्म होता है, तब सबको आनन्द होता है। परन्तु तब तक होता है कि जब तक जन्मपत्र बनके ग्रहों का फल न सुने। जब पुरोहित जन्मपत्र बनाने को कहता है तब उसके माता-पिता पुरोहित से कहते हैं ‘महाराज! आप बहुत अच्छा जन्मपत्र बनाइए’जो धनाढय हो तो बहुत सी लाल-पीली रेखाओं से चित्र-विचित्र और निर्धन हो तो साधारण रीति से जन्मपत्र बनाके सुनाने को आता है। तब उसके मां-बाप ज्योतिषी जी के सामने बैठके कहते हैं ‘इसका जन्मपत्र अच्छा तो है?’ ज्योतिषी कहता है ‘जो है सो सुना देता हूँ, इसके जन्मग्रह बहुत अच्छे और मित्रग्रह भी अच्छे हैं, जिनका फल धनाढय और प्रतिष्ठावान् जिस सभा में जा बैठेगा, तो सबके ऊपर इसका तेज पड़ेगा, शरीर से आरोग्य और राज्यमान भी होगा।’इत्यादि बातें सुनके पिता आदि बोलते हैं ‘वाह-वाह ज्योतिषी जी! आप बहुत अच्छे हो।’ज्योतिषी जी समझते हैं इन बातों से कार्य सिद्ध नहीं होता, तब ज्योतिषी बोलता है कि ‘ये ग्रह तो बहुत अच्छे हैं, परन्तु ये ग्रह क्रूर हैं अर्थात् फलाने-फलाने ग्रह के योग से ८ वें वर्ष में इसका मृत्युयोग है।’इसको सुन के माता-पितादि पुत्र के जन्म के आनन्द को छोड़के शोकसागर में डूबकर, ज्योतिषीजी से कहते हैं कि ‘महाराज जी! अब हम क्या करें?’ तब ज्योतिषी जी कहते हैं ‘ उपाय करो।’ गृहस्थ पूछे- ‘क्या उपाय करें?’ ज्योतिषी जी कहते हैं कि ‘ऐसा-ऐसा दान करो, ग्रह के मन्त्र का जप कराओ और नित्य ब्राह्मणों को भोजन कराओगे, तो अनुमान है कि नवग्रहों के विघ्न हट जाएँ।’ अनुमान शब्द इसलिए है कि जो मर जाएगा तो कहेंगे, हम क्या करें, परमेश्वर के ऊपर कोई नहीं है, हमने तो बहुत सा यत्न किया और तुमने कराया, उसके कर्म ऐसे ही थे। और जो बच जाए तो कहते हैं कि देखो-हमारे मन्त्र, देवता और ब्राह्मणों की कैसी शक्ति है! तुम्हारे लड़के को बचा दिया।

यहाँ यह बात होनी चाहिए कि जो इनके जप, पाठ से कुछ न हो तो दूने-तिगुणे रुपये उन धूर्त से ले-लेने चाहिएँ और बच जाए तो भी ले-लेने चाहियें, क्योंकि जैसे ज्योतिषियों ने कहा कि ‘इसके कर्म और परमेश्वर के नियम तोड़ने का सामर्थ्य किसी का नहीं’, वैसे गृहस्थ भी कहें कि ‘यह अपने कर्म और परमेश्वर के नियम से बचा है, तुम्हारे करने से नहीं’। ….

जो माता, पिता और आचार्य सन्तान और शिष्यों का ताड़न करते हैं, वे जानों अपने सन्तान और शिष्यों को अपने हाथ से अमृत पिला रहे हैं, और जो सन्तानों वा शिष्यों का लाडन करते हैं, वे अपने सन्तानों और शिष्यों को विष पिला के नष्ट-भ्रष्ट कर देते हैं। क्योंकि लाडन से सन्तान और शिष्य दोषयुक्त तथा ताड़ना से गुणयुक्त होते हैं। और सन्तान और शिष्य लोग भी ताड़ना से प्रसन्न और लाडन से अप्रसन्न सदा रहा करें। परन्तु माता-पिता तथा अध्यापक लोग ईर्ष्या, द्वेष से ताड़न न करें, किन्तु ऊपर से भयप्रदान और भीतर से कृपादृष्टि रक्खें।….

आर्य समाज संषर नगर इंदौर म.प्र.9977987777